पूरब के मैनचेस्टर की पहचान कानपुर को वापस दिलायेगी योगी सरकार

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लखनऊ। पूरब के मैनचेस्टर के तौर पर दशकों तक अपनी पहचान दर्ज कराने वाला कानपुर शहर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयास से एक बार फिर विश्व के मानचित्र पर चमकता दिखाई देगा। सरकार के प्रयासों से देश के बड़े -बड़े उद्योगपति कानपुर और उसके आसपास अपनी इंडस्ट्री लगाने में रूचि दिखा रहे हैं। इन उद्योपतियों ने टेक्सटाइल से लेकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश किया है। इसके अलावा कानपुर में मेगा लेदर पार्क स्थापित किया जा रहा है। मेगा लेदर क्लस्टर प्रोजेक्ट के तहत 235 एकड़ में बनने वाले इस मेगा लेदर पार्क में 50 हजार लोगों को नौकरी मिलेगी और 5850 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। श्री योगी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट से कानपुर में फिर टेक्सटाइल हब और लेदर सिटी के नाम से जाना जाने लगेगा।
प्रदेश में गंगा के किनारे बसा औद्योगिक शहर कानपुर देश के प्रमुख शहरों में शामिल है। एक दौर में कपड़ा उद्योग के चलते कानपुर को पूरब का मैनचेस्टर कहा जाता था। यहां के लेदर कारोबार के चलते भी इस शहर को लेदर सिटी कहा जाता रहा था मगर बढ़ते प्रदूषण और कपड़ा उद्योग में हुए तकनीकी बदलाव तथा पूर्व सरकारों की उपेक्षा के चलते यह शहर अपनी पहचान खोता चला गया। कानपुर का जिक्र देश के सबसे प्रदूषित शहरों में किया जाने लगा।
सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस ऐतिहासिक शहर को फिर विश्व व्यापी पहचान देनी की ठानी है जिसके तहत उनके दिशानिर्देशन में कानपुर को टेक्सटाइल हब और लेदर सिटी के नाम से फिर विख्यात करने के लिए मेगा लेदर पार्क का प्रोजेक्ट तैयार हुआ। इसके साथ ही टेक्सटाइल और अन्य उद्योगों की स्थापना के लिए उद्योपतियों से कानपुर में अपनी इंडस्ट्री लगाने के लिए मिले प्रस्तावों का संज्ञान लेकर उद्योगपतियों से संपर्क किया गया। उन्हें बताया गया कि प्रदेश सरकार ने राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक नीतियों में तमाम संशोधन किए गए हैं।
औद्योगिक विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीतियों से प्रभावित हो कर अब बड़े- बड़े उद्योगपति कानपुर में टेक्सटाइल सहित कई क्षेत्र में अपनी इंडस्ट्री लगा रहे हैं। मात्र तीन वर्षों में कानपुर शहर तथा कानपुर देहात में इंडस्ट्री लगाने को लेकर 23 प्रस्ताव मिले हैं। करीब चार हजार करोड़ रुपए के इन निवेश प्रस्तावों के जमीन पर उतरने से करीब सात हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। निवेश संबंधी 23 प्रस्तावों में से 11 पर उद्योगपतियों ने अपनी यूनिट (फैक्ट्री) भी लगा ली है और उत्पादन शुरू करने की स्थिति में हैं।
अधिकारियों के अनुसार, आरपी पॉलीपैक्स ने कानपुर में डेढ़ सौ करोड़ रुपए का निवेश कर टेक्सटाइल फैक्ट्री का निर्माण किया है। कानपुर प्लास्टिक लिमिटेड ने कानपुर देहात में दो सौ करोड़ रुपए की लागत से टेक्सटाइल फैक्ट्री बनाई है। इन कंपनियों में उत्पादन शुरू हो गया है। इसके अलावा स्पर्श इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने कानपुर देहात में 600 करोड़ रुपए का निवेश प्लास्टिक फैक्टी के निर्माण पर किया है। कानपुर देहात में ही रिमझिम इस्पात कंपनी 550 करोड़ रुपए का निवेश कर स्टील रोलिंग मिल का निर्माण करा रही है। बहुमंजिली इमारत में गैर प्रदूषणकारी उद्योगों की स्थापना के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई योजना के तहत कानपुर में प्रदेश की फ्लैटेड फैक्ट्री लगाने पर भी कार्य शुरू हो गया है।
इसके अलावा कानपुर के लिए बेहद गेमचेंजर साबित होने वाले मेगा लेदर पार्क की स्थापना का कार्य भी तेजी से होने लगा है। यह लेदर पार्क कानपुर के रमईपुर गांव में बनेगा। इसकी स्थापना के लिए 235 एकड़ में भूमि अधिग्रहित हो चुकी है। केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की मंजूरी इस पार्क की स्थापना के लिए मिल चुकी है। कानपुर स्थापित हो रहा यह देश में पहला लेदर पार्क होगा। इसकी स्थापना होने से कानपुर देश के दस बड़े लेदर मैन्युफैक्चरिंग राज्यों में अपने स्थान को और बेहतर करने में सफल होगा।
कानपुर में मेगा लेदर क्लस्टर प्रोजेक्ट के तहत बनने वाले लेदर पार्क में 50,000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। जबकि डेढ़ लाख लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार पाएंगे। डेढ़ सौ से अधिक टेनरी इस पार्क में कार्य करेगी। चमड़े से बनने जूते, पर्स, जैकेट से लेकर अन्य विश्वस्तरीय उत्पाद इस पार्क में बनाकर उनका निर्यात किया जा सकेगा।

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