अंटार्कटिका में आज पहली बार किसी इंसान के पड़े थे कदम, साथ एक दर्जन से अधिक कुत्ते भी रहे मौजूद

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दुनिया में नॉर्वे के रोआल्ड एमंडसन ऐसे पहले शख्स थे, जो आज ही के दिन यानी 14 दिसंबर 1911 को अंटार्कटिका पहुंचे थे. अंटार्कटिका को पृथ्वी के साउथ पोल से भी जाना जाता है. रोआल्ड एमंडसन अपनी टीम के साथ आज के ही दिन अंटार्कटिका पहुंचे थे, जहां उनके द्वारा वहां पहुंचकर उनके देश नॉर्वे का झंडा फहराया था.

बता दें ये टीम 19 अक्टूबर 1911 को अंटार्कटिका के लिए निकली थी और करीब दो महीने पूरे होने से कुछ दिन पहले वहां पहुंची. जब वे चले थे तो उनकी टीम में 3 पुरुष और 52 कुत्ते शामिल थे. हालांकि, सिर्फ 16 कुत्ते ही अंटार्कटिका पहुंच सके थे. बताया जाता है कि बाकी के कुत्तों को खा लिया गया था.नॉर्वे के रॉबर्ट स्कॉट भी 1 नवंबर 1911 को अपनी टीम से साथ साउथ पोल की तरफ निकले थे. हालांकि, उनकी टीम जब 17 जनवरी 1912 को वहां पहुंची तो उन्हें पता चला कि एमंडसन पहले ही फतह हासिल कर चुके हैं. बता दें कि साउथ पोल से लौटते समय स्कॉट की मौत हो गई थी.

नॉर्वे से निकला एक और शख्स

बता दें कि कोरोना वायरस महामारी के इस दौर में अंटार्कटिका भी ऐसी जगह है, जो कोविड-19 से बची हुई है. यहां सितंबर महीने में पहली यूएस फ्लाइट पहुंची थी. इसमें 106 यात्री और क्रू मेंबर मौजूद थे. इस दौरान विशेष एहतियात बरते गए ताकि कोरोना वायरस महाद्वीप से इस जानलेवा वायरस को दूर रखा जा सके. यात्रा से पहले सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स का कोरोना टेस्ट किया गया. एपी एजेंसी के अनुसार करीब एक हजार वैज्ञानिक और अन्य लोग इस बर्फीली जगह पर रहते हैं. इन लोगों ने एक वैश्विक प्रयास शुरू किया है, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जा सके कि यहां आने वाले उनके सहकर्मी अपने साथ यह जानलेवा वायरस लेकर न आएं.

जानकारी के मुताबिक, मार्च में जिस वक्त दुनिया भर में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लागू किया जा रहा था, उस वक्त अंटार्कटिक प्रोग्राम ने महाद्वीप के लिए महामारी के विनाशकारी होने की बात कही थी. दुनिया की सबसे तेज हवाएं और सर्द मौसम पहले ही रिसर्च सेंटर के कर्मियों के लिए खतरनाक हैं. काउंसिल ऑफ मैनेजर ऑफ नेशनल अंटार्कटिक प्रोग्राम के दस्तावेज के मुताबिक बहुत ज्यादा संक्रामक कोरोना वायरस अंटार्कटिका के सख्त वातावरण में ज्यादा जानलेवा और तेजी से फैल सकता है और मेडिकल सुविधा के सीमित होने के संभावित तौर पर भयानक परिणाम हो सकते हैं.

 

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