पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सुनवाई आगे बढ़ी, अब इस तारीख को होगी

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भोपाल: मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर शनिवार को होने वाली सुनवाई टल गई. सुप्रीम कोर्ट अब 13 दिसंबर को इस मामले पर सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि महाराष्ट्र में भी आरक्षण के मामले पर सुनवाई होनी है, लिहाजा 13 दिसंबर को दोनों मामलों पर एक साथ सुनवाई की जाएगी. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ओर से 9 दिसंबर को पंचायत चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. दरअसल, शिवराज सरकार ने 2019-20 में पंचायत चुनाव का आरक्षण निर्धारित कर दिया था. अधिसूचना भी जारी हो गई थी. इस पुरानी अधिसूचना को निरस्त किए बिना ही शिवराज सरकार ने नई अधिसूचना जारी कर दी. मध्यप्रदेश सरकार ने 21 नवंबर को आगामी पंचायत चुनाव 2014 के आरक्षण रोस्टर के आधार पर कराने का ऐलान किया था. इसी को लेकर कांग्रेस ने पंचायत चुनाव पर अंतरिम रोक लगाने की मांग करते हुए याचिका दायर की है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने चार दिसंबर को पंचायत चुनाव की घोषणा की थी. इसके बाद ग्राम पंचायतों में आचार संहिता लागू हो गई है. पहले चरण का मतदान 6 जनवरी 2022, दूसरे चरण का 28 जनवरी और तीसरे चरण का चुनाव 16 फरवरी को होगा. भोपाल, इंदौर ग्वालियर समेत 9 जिलों में एक ही चरण में चुनाव संपन्न होंगे. 7 जिले ऐसे हैं जहां दो चरणों में चुनाव होंगे. अन्य 36 जिलों में सभी तीन चरणों में मतदान कराया जाएगा. मतदान सुबह 7 से दोपहर 3 बजे तक होगा. मध्य प्रदेश में 22 हजार 695 ग्राम पंचायतों में चुनाव होना है, जिसके लिए 71 हजार 398 पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे.

राज्य निर्वाचन आयुक्त के अनुसार, मतदान का समय सुबह 7 बजे से 3 बजे तक रहेगा. इसके लिए 4 लाख 75 हज़ार मतदान कर्मियों को तैनात किया जाएगा. राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, ग्राम स्तर पर बैलेट पेपर के ज़रिए वोटिंग होगी, जबकि जिला और जनपद सदस्य के लिए ईवीएम से चुनाव होगा. राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव के लिए करीब 3 करोड़ 92 लाख से ज्यादा मतदाता हैं. इनमें से 2 करोड़ 2 लाख 30 हज़ार पुरुष मतदाता हैं तो महिला मतदाताओं की संख्या 1 करोड़ 90 लाख 20 हज़ार हैं. प्रदेश में पंचायत चुनाव की घोषणा होते ही राजनीतिक पार्टियों की सक्रियता भी नजर आने लगी है. यह चुनाव राजनीतिक पार्टियों के लिए खास माने जाते हैं. हालांकि कोई भी पार्टी सीधे तौर पर यह चुनाव नहीं लड़ती, लेकिन समर्थित कैंडिडेट के माध्यम से पार्टियों के लिए खास महत्व रहता है.

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