दुनियां की सबसे अजीब बीमारी डांस करते हुए करीब 400 लोगों ने गवाई जान

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कोरोना महामारी आने के बाद दुनियाभर में लाखों लोगों ने अपनी जान गंवा दी है. कोरोना वायरस आने से पहले क्या किसी ने सोचा था कि एक ऐसी गुमनाम बीमारी आएगी और दुनियाभर में लाखों लोगों की जिंदगियां ले जाएगी. आज हम आपको ऐसी ही एक अजीबोगरीब बीमारी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिस बीमारी की चपेट में आने के बाद लोग नाचते-नाचते अपनी जान गंवा देते थे.

यह रहस्यमयी बीमारी में साल 1518 में फैली थी. अब जबकि इस बीमारी के बीतने के 500 साल से भी ज्यादा समय हो गया है, फिर भी वैज्ञानिक इस रहस्य के बारे में नहीं जान पाए हैं. साल 1518 में फैली इस बीमारी ने फ्रांस में 400 से ज्यादा लोगों को अपनी चपेट में ले लिया था. इसे डांस की महामारी  कहा गया था.

अचानक घर के बाहर आकर नाचने लगी थी एक युवती
सबसे पहले एक युवती इस बीमारी की चपेट में आई थी. एक युवती साल 1518 के जुलाई के महीने में अचानक से डांस करने लगी थी. युवती का नाम फ्राउ ट्रॉफी था. डांस करते-करते वह अपना होश खो बैठी थी और नाचने में इतनी ज्यादा मस्त हो गई थी कि डांस करते-करते ही घर के बाहर गली में आ गई थी. फ्राउ को ऐसे नाचते देख आस-पास के लोग हैरान रह गए थे.

फ्राउ को नाचते देख उसके परिजन उसे वहां समझाने पहुंचे. हालांकि उसके परिजन भी डांस करने लगे थे. देखते ही देखते वहां लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी. इसके बाद सभी लोग डांस करने लगते हैं. फिर अचानक न जाने क्या होता है कि डांस-डांस करते लोग गश खाकर जमीन पर गिरने लगे और उनकी जान चली गई.

नाचते-नाचते गश खाकर गिरे और चली गई जान
इस घटना के दौरान देखते ही देखते 30 से अधिक लोग डांस करते-करते मर गए थे. घटना से पूरे फ्रांस में हड़कंप मच गया था तथा लोग काफी डर गए थे. इसके बाद फ्रांस के कई इलाकों में ऐसे ही लोगों के डांस करते-करते मरने की खबरें सामने आने लगी थीं. शहर दर शहर लोगों के डांस करते हुए मरने का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था. जैसे ही किसी के डांस करने की खबर सामने आती थी, उसे अस्पताल में भर्ती करवाया जाता था.

फ्रांस की इस रहस्यमयी घटना के बारे में उस दौर के वैज्ञानिकों ने जमकर रिसर्च किया था, लेकिन उन्हें इसका कोई सही कारण पता नहीं लग पाया था. वैज्ञानिकों ने इस बीमारी को ‘डांसिंग प्लेग’ नाम दिया था. धीरे-धीरे अपने आप ही यह बीमारी खत्म हो गई थी. आज इस बीमारी के 500 साल बीत जाने के बाद भी वैज्ञानिक इस बीमारी के रहस्य का पता लगाने में असमर्थ हैं. आज भी इस रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका है.

 

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