नागालैंड फायरिंग मामले को लेकर विपक्ष का संसद में जोरदार हंगामा, AFSPA कानून हटाए जाने की मांग हुई तेज

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गृह मंत्री अमित शाह ने ये स्वीकार किया कि नगालैंड में सेना की फायरिंग एक गलती थी और सेना ने नागरिकों को पहचानने में गलती की. इस घटना की जांच के लिए बनी SIT एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी.

अब फिक्र नगालैंड फायरिंग की, जहां शनिवार देर शाम को मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलियों से 14 लोगों की मौत हुई जबकि 11 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इस घटना में एक जवान की भी मौत हो गई. आज इस मुद्दे पर संसद में विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया. नगालैंड फायरिंग और आम नागरिकों की मौत के मामले में विपक्ष के हंगामे के बाद खुद गृह मंत्री अमित शाह  ने लोकसभा में सरकार का पक्ष रखा. उन्होंने संसद को घटना की डिटेल में जानकारी दी.

गृह मंत्री ने अपने बयान में कहा कि उग्रवादियों के मूवमेंट की सूचना पर सेना ने जाल बिछाया. उसी दौरान वहां से एक वाहन गुजरा. रोके जाने के बावजूद वाहन नहीं रुका तो सुरक्षाबलों ने फायरिंग की, जिसमें 6 नागरिक मारे गए. बाद में हंगामा कर रहे स्थानीय लोगों को नियंत्रित करने के लिए गोलियां चलाई गईं, जिसमें और नागरिक मारे गए.

नगालैंड में सेना की फायरिंग एक गलती- गृह मंत्री

पूरी घटना की जानकारी देने के बाद गृह मंत्री ने ये स्वीकार किया कि नगालैंड में सेना की फायरिंग एक गलती थी और सेना ने नागरिकों को पहचानने में गलती की. इस घटना की जांच के लिए बनी SIT एक महीने के अंदर रिपोर्ट सौंपेगी. 4 दिसंबर को भारत-म्यांमार सीमा के पास नगालैंड के मोन जिले में सैन्य गोलीबारी में 14 नागरिकों और एक सैनिक के मारे जाने के बाद से ही सियासत तेज हो गई थी.

कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष का केंद्र सरकार पर हमला

कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष केंद्र सरकार पर निशाना साध रह था. आज भी सदन की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष ने हंगामा किया. लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने नगालैंड फायरिंग का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री को सदन में बयान देना चाहिए. राज्यसभा में भी कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खडगे ने इस घटना को उठाया. खडगे ने कहा कि ये बेहद दुखद घटना है. खडगे ने भी गृह मंत्री के बयान की मांग की.

कांग्रेस के साथ ही आरजेडी, एसपी और शिवसेना ने भी सदन में सरकार को घेरने की कोशिश की. इस बीच तृणमूल कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल भी पीड़ितों से मिलने के लिए नगालैंड के मोन इलाके में जाने वाला था जहां घटना हुई, लेकिन अचानक टीएमसी ने इस दौरे को रद्द कर दिया. हालांकि मोन में आज भी हलचल रही. नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने मोन जिले में सुरक्षाबलों की फायरिंग से मरने वाले नागरिकों को अंतिम विदाई दी. सीएम ने मोन में मृतकों के पार्थिक शरीर को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उन्होंने एक बार फिर से राज्य में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट यानी AFSPA को हटाने की मांग की.

नगालैंड में एक बार फिर AFSPA कानून हटाए जाने की मांग हुई तेज

शनिवार देर शाम सुरक्षाबलों की फायरिंग में लोगों की मौत के बाद नगालैंड में एक बार फिर से AFSPA कानून हटाए जाने की मांग तेज हो गई है. ये घटना ऐसे समय हुई है, जब केंद्र सरकार लगातार नगा विद्रोही गुटों के साथ शांति वार्ता कर रही है. लिहाजा नगालैंड की घटना बेहद संवेदनशील है, जिसमें बेहद संवेदनशीलता के साथ ही आगे बढ़ने की जरूरत है.

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