Omicron: क्या कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को कोविड वैक्सीन की एक्सट्रा डोज देगी सरकार?

Spread the love

कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रॉन के बढ़ते खतरे के बीच बूस्टर डोज की चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है. रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार जल्द ही बूस्टर डोज पर पॉलिसी लाने वाली है. ओमीक्रॉन से संक्रमित होने वालों में वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोग भी शामिल हैं. ऐसे में एक चर्चा यह भी हो रही है कि क्या जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर हो चुकी है, क्या उन्हें वैक्सीन की एक्सट्रा डोज लेनी होगी.

इधर, टीकाकरण अभियान पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) की छह दिसंबर को होने वाली बैठक को लेकर खबर आ रही है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले व्यक्तियों को कोविड वैक्सीन की ‘अतिरिक्त’ खुराक देने के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी है.

कैसे अलग है एक्सट्रा डोज और बूस्टर डोज?

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों का कहना है कि वैक्सीन की एक अतिरिक्त खुराक बूस्टर डोज से अलग होती है. अधिकारियों ने समझाया कि ऐसे किसी व्यक्ति को एक पूर्वनिर्धारित अवधि के बाद बूस्टर डोज दी जाती है, जब यह माना जाता है कि प्राथमिक टीकाकरण की इम्यून रेस्पॉन्स यानी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में कमी आ गई है. वहीं, एक्सट्रा डोज यानी अतिरिक्त खुराक कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को दी जाती है जब प्राथमिक टीकाकरण संक्रमण और बीमारी से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं करता है.

सीरम इंडिया ने मांगी है बूस्टर डोज की अनुमति

बता दें कि हाल ही में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने औषधि नियामक से कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ बूस्टर खुराक के रूप में कोविशील्ड के लिए मंजूरी मांगी है. कंपनी में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने भारत के औषधि महानियंत्रक (DCGI) को एक अर्जी में कहा था कि ब्रिटेन के औषधि व स्वास्थ्य देखभाल उत्पाद नियामक एजेंसी ने पहले ही एस्ट्राजेनेका सीएचएडीओएक्स1 एनसीओवी-19 (chadox1 ncov-19) टीके के बूस्टर खुराक को मंजूरी दे दी है.

उन्होंने साथ ही यह भी उल्लेख किया कि भारत में कोविशील्ड की कोई कमी नहीं है और नये स्वरूपों के सामने आने के मद्देनजर बूस्टर खुराक की मांग उन लोगों के लिए है जो पहले से ही दो खुराक ले चुके हैं.

INSACOG ने क्या कहा था?

भारतीय सार्स-सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम’ (INSACOG) ने 29 नवंबर के अपने बुलेटिन में, 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोविड-19 टीकों की बूस्टर खुराक की सिफारिश की थी, जिसमें उनलोगों को पहली प्राथमिकता दी जाए जिनके संक्रमित होने का खतरा सबसे अधिक है. हालांकि, शनिवार को इसने कहा कि इसकी सिफारिश राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के लिए नहीं थी क्योंकि इसके प्रभाव का आकलन के लिए कई और वैज्ञानिक प्रयोगों की आवश्यकता है.

स्वास्थ्य मंत्री ने क्या कहा?

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बूस्टर खुराक के संबंध में हाल ही में लोकसभा को सूचित किया था कि टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (NTAGI) और कोविड-19 टीकाकरण पर राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह (NEGVAC) इस पहलू से संबंधित वैज्ञानिक प्रमाणों पर विचार कर रहे हैं.

एजेंडा में फिलहाल बूस्टर डोज का मुद्दा शामिल नहीं

रिपोर्ट के अनुसार, एक आधिकारिक सूत्र ने कहा है कि अभी के लिए बूस्टर डोज का मुद्दा एजेंडा में नहीं है, क्योंकि इसकी आवश्यकता और महत्व का पता लगाने के लिए अध्ययन किए जा रहे हैं. छह दिसंबर को होने वाली एनटीएजीआई की बैठक में कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को कोविड-19 की अतिरिक्त खुराक देने के मुद्दे पर विचार किया जाएगा.

किन लोगों को दी जा सकती है एक्सट्रा डोज?

जिन कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए वैक्सीन की एक्सट्रा डोज की सिफारिश हो सकती है, उनमें कैंसर का इलाज कराने वाले मरीज, ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज, एड्स के मरीज वगैरह आते हैं. उनकी प्रतिरक्षा में सुधार के लिए वैक्सीन की अतिरिक्त डोज यानी तीसरी खुराक की आवश्यकता होती है.

विशेषज्ञों ने कहा कि ओमीक्रोन जैसे नये स्वरूपों के उभरने के बावजूद, टीकाकरण बीमारी और संक्रमण से सुरक्षा के सबसे मजबूत तरीकों में से एक है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि हालांकि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि मौजूदा वैक्सीन वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप पर काम नहीं करते हैं, हालांकि सामने आये कुछ म्यूटेशन टीके की प्रभावशीलता को कम कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.