20 रुपये की पानी की बोतल किसी कैफे में 50 और 5 स्टार होटल में 300 रुपये की क्यों हो जाती है? जानिए वजह

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दरअसल, देश में अधिकतम खुदरा मूल्य या MRP के लिए एक खास कानून है. इस कानून का नाम लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट कहते हैं. इस एक्ट के जरिये केंद्र सरकार का खाद्य उपभोक्ता मंत्रालय एमआरपी के बारे में निर्देश जारी करता है. निर्देश में बताया जाता है कि कंपनियों को अपने उत्पाद की कीमतें कैसे लिखनी हैं और इसका क्या नियम होगा

क्या आपने कभी सोचा है कि 10 रुपये की पानी की बोतल कैफे में 50 रुपये और किसी 5 सितारा होटल में 300 रुपये की क्यों हो जाती है? बोतल भी एक और पानी भी एक, फिर जगह बदलने से रेट क्यों बदल जाता है? अगर इस बात को आजमाना चाहते हैं तो किसी दुकान से पानी की बोतल खरीदें. उसी बोतल को किसी कैफे या होटल से खरीदें. आपको रेट के भाव में अंतर साफ दिख जाएगा.

दरअसल, यह बात आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने एक ट्वीट में उठाई है. उन्होंने ट्वीट में लिखा है, सुपरमार्केट में वॉटर बोतल की कीमत 10 रुपये, कैफे में 50 रुपये और किसी 5 स्टार होटल में 300 रुपये होती है. वे लिखते हैं, एक ही बोतल, एक ही ब्रांड. केवल जगह बदलती है. अलग-अलग स्थान एक ही चीज की अलग-अलग वैल्यू देती है. अगर आप खुद को बेकार समझते हैं तो जगह बदल कर देखिए. इससे हमेशा वैल्यू बढ़ती है.

इसी बहाने आइए जानते हैं कि पानी की बोतल के दाम अलग-अलग क्यों होते हैं-

इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला है. दरअसल, देश में अधिकतम खुदरा मूल्य या MRP के लिए एक खास कानून है. इस कानून का नाम लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट कहते हैं. इस एक्ट के जरिये केंद्र सरकार का खाद्य उपभोक्ता मंत्रालय एमआरपी के बारे में निर्देश जारी करता है. निर्देश में बताया जाता है कि कंपनियों को अपने उत्पाद की कीमतें कैसे लिखनी हैं और इसका क्या नियम होगा. लेकिन पानी की बोतल के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट में कहा कि रेस्टोरेंट या होटल बोतलबंद पानी या अन्य पैकेटबंद उत्पाद को एमआरपी से ज्यादा रेट पर बेच सकते हैं. शीर्ष अदालत ने कहा कि चूंकि होटल और रेस्टोरेंट पानी आदि सर्व करने में अपनी सेवा देते हैं, इसलिए उन्हें अपने हिसाब से एमआरपी से ऊपर पैसे लेने का अधिकार है.

पहले हो चुकी है बहस

पानी की बोतल के दाम को लेकर देश में कई बार गंभीर बहस हो चुकी है. उपभोक्ता मंत्रालय को अक्सर एमआरपी से जुड़ी शिकायतें मिलती रही हैं. साल 2016 में तत्कालीन खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि अगर किसी उपभोक्ता से पानी की बोतल के दाम एमआरपी से ज्यादा वसूला जाए तो इसकी तुरंत शिकायत दर्ज कराएं.

लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट की धारा 36 में कहा गया है कि किसी भी प्री-पैकेज्ड सामान की बिक्री, वितरण या डिलीवरी में शामिल कोई भी व्यक्ति जो पैकेज पर घोषणाओं के मुताबिक नहीं है, वह कानून में जुर्माने के साथ दंडनीय है. इस अपराध के लिए 25,000 रुपये का दंड लग सकता है. दूसरे अपराध के लिए जुर्माना 50,000 रुपये तक हो सकता है. इसके अलावा, बाद के अपराधों के लिए एक लाख रुपये तक के जुर्माने या एक साल की कैद या दोनों से दंडित किया जाएगा. इसी में वह अपराध भी शामिल है जिसमें एमआरपी से अधिक कीमत पर पानी की बोतल को बेचना है.

अब सवाह है कि क्या कोई होटल या रेस्तरां पीने के पानी की बोतल के लिए कंटेनर पर लिखे गए अधिकतम खुदरा मूल्य से अधिक पैसा ले सकता है? इसका जवाब है हां. उपभोक्ताओं को एक बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसका फैसला दिया था. फैसले में कहा था कि होटल और रेस्तरां अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) पर बोतल या पैकेटबंद सामान बेचने के लिए बाध्य नहीं हैं. कोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया कि लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत प्री-पैक या पैकेज्ड प्रोडक्ट्स के लिए ओवरचार्जिंग एक अपराध है, जिसके तहत 25,000 रुपये का जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है.

 

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