प्राचीन भारत का इतिहास जानना हो तो ये किताबें जरूर पढ़ें

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VM news desk CG:

यह आरोप है कि भारत के इतिहास को लेकर पूर्व के इतिहासकारों में मतभेद का कारण मत भिन्नता है या उनका किसी विशेष विचारधारा से जुड़ा होना रहा है और साथ ही इतिहास के तथ्‍यों का प्रमाणों के साथ अपडेट करने की जरूरत भी होती रही है परंतु यह कार्य कभी किया नहीं किया। अभी तक भारत का एक ऐसा इतिहास नहीं लिखा गया जिसे की हम पढ़कर यह मान लें कि यह पर स्थापित सत्य है। इसीलिए कहना होगा कि इतिहास को हजार आंखों से पढ़कर उसमें से सत्य को निकालना होगा। तो आओ जानते हैं कि भारत का इतिहास जानना हो तो कौनसी किताबें हमें जरूर पढ़ना चाहिए।

1. धर्मशास्त्र का इतिहास : जब हम इतिहास के शुरुआत की बात करते हैं तो भारतीय धर्म और यहां की संस्कृति के प्रारंभिक इतिहास को सबसे पहले जानना जरूरी है। भारतरत्न पाण्डुरंग वामन काने द्वारा लिखा गया ‘धर्मशास्त्र का इतिहास’ बहुत ही वृहद ग्रंथ है। इस ग्रंथ की सलाह हमने आपको इसलिए दी क्योंकि इसमें आपको इसके आरंभ में प्रसिद्ध एवं महत्त्वपूर्ण ग्रंथों तथा लेखकों का काल निर्धारण और उनके इतिहास ग्रंथों के बारे में जानकारी मिलेगी।

2. किताब-उल-हिन्द : अल बेरूनी एक फारसी विद्वान था। मध्यकाल के सबसे प्रसिद्ध इतिहासकारों में उसकी गिनती की जाती है। वह मेहमूद गजनवी के काल में उसका राज ज्योतिष था। वह अबबी, फारसी, तुर्की के साथ ही संस्कृत भाषा का विद्वान था। अलबेरूनी ने ‘किताब-उल-हिन्द’ नामक पुस्तक लिखी थी। इसमें इस्लामिक के आक्रमण के पूर्व के भारतीय इतिहास का प्रामाणिक विवरण मिलता है। इस किताब के अंग्रेजी और हिन्दी में अनुवाद मिल जाएंगे। इसके बाद के इतिहास के लिए अबुल फजल द्वारा लिकिथ अकबरनामा भी पढ़ सकते हैं। मोहम्‍मद काजिम गिराजी का आलमगीरनामा भी पढ़ सकते हो।

3. इंडिका : चंद्रगुप्त मौर्य के काल में यूनान का एक यात्री मेगस्थनीज आया था। वह ग्रीक और संस्कृत भाषा का विद्वान था। इसमें मौर्यकालीन भारत के इतिहास का विवरण मिलता है।

4. सी-यू-की : चीन का यात्री ह्वेन त्सांग राजा हर्षवर्धन के काल में भारत आया था। वह भारत में 15 वर्षों तक रहा। उसने अपनी पुस्तक सी-यू-की में अपनी यात्रा तथा तत्कालीन भारत का विवरण दिया है। राजा हर्षवर्धन का शासन अखंड भारत के करीब आधे हिस्से पर था और उस काल में दक्षिण भारत में सम्राट पुलकेशिन द्वितीय का शासन था। ह्वेन त्सांग की भारत यात्रा का वृतांत हमें चीनी ग्रंथ ‘सी यू की’, वाटर्ज की पुस्तक ‘On Yuan Chwang’s Travel In India ‘ एवं ह्मुली की पुस्तक ‘Life of lliven Tsang’ में मिलता है।

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6. हर्षचरित : इस पुस्तक से हमें भारत के महान सम्राट हर्ष के जीवन और उनके काल के भारत के इतिहास के बारे में अच्‍छी जानकारी मिलती है। इस पुस्तक को लिखने वाले हैं हर्ष के राज्य के राजकवि बाणभट्ट।

7. राजतरंगणी : यह किताब कश्मीर के प्रसिद्ध कवि कल्हण ने लिखी है। इसमें कश्मीर के आरंभ से लेकर लेखक के काल तक का क्रमबद्ध इतिहास दर्ज होने के साथ ही उस काल के भारत की झलक भी है। तत्कालीन भारतीय इतिहास के संबंध में भी राजतरंगिणी ग्रंथ महत्त्वपूर्ण और प्रमाणिक ग्रंथ है जिसका रेफरेंस अधिकतर इतिहासकार देते हैं।

: 8. वृहत्तर भारत का इतिहास : भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार द्वारा लिखा गया यह बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रंथ है। रामशरण उपाध्याय कभी मॉरीशस में भारत के राजदूत भी रहे थे।

9. ‘द आर्ग्यूमेंटेटिव इंडिया’ : यह किताब अर्थशास्त्री और उपन्यासकार अमर्त्य सेन द्वारा लिखी गई है। इस किताब में भारत की संस्कृति और इतिहास को एक अलग ही नजरिये से लिखा गया है। इस किताब से हमें पता चलते है कि प्राचीन भारत में भी डिबेट और वाद-विवाद का प्रचलन था और यह भी कि किस तरह अंग्रेजों ने हमारे इतिहास के गौरवशाली तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया।

10. डिस्कवरी ऑफ इंडिया : यह किताब पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा द्वारा लिखी गई है। हालांकि कई लोग इस किताब से इत्तेफाख रखते हैं और मानते हैं कि नेहरू की दृष्‍टि इतिहास को लेकर संकिर्ण थी। फिर भी इस किताब को पढ़ने से हमें इतिहास की थोड़ी बहुत जानकारी मिलती है। यह किताब नेहरूजी ने 1942 से 1946 के बीच लिखी थी, जब आजादी के संघर्ष के दौरान वो जेल में थे।

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