सरपंच सचिव संघ की हड़ताल कहीं संघ में पदाधिकारियों की अस्तित्व की लड़ाई तो नहीं….?

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  • पंचायतों में कमिशन का चल रहा बड़ा खेल, रहस्य के खुलासे का डर सता रहा पदाधिकारियों को

गुरुर/धमतरी। गुरुर ब्लाक में सरपंच सचिव संघ के द्वारा की जा रही हड़ताल की परतें अब धीरे धीरे खुलने लगी है। ब्लाक के सीईओ को हटाने की मांग के पीछे संघ से जुड़े दो पदाधिकारियों की संघ में अस्तित्व की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। सीईओ की कार्य करने की शैली से और न ही किसी अन्य बात से कोई तकलीफ थी, किन्तु संघ में बने रहने की दबाव एवम कुछ पदाधिकारी की सोची समझी रणनीति के कारण यह असोचनीय कार्य हो गया। कुछ सचिव एवम सरपंच का तो यह भी कहना है सीईओ की बात सुने बिना जल्दबाजी में उठाया गया कदम है। इस लड़ाई में निहायत कमजोर कर्मचारी रोजगार सहायक भी पद से पृथक होने के डर से आ गये हैं ।
जब कोई अधिकारी अपने निष्पक्ष शैली से कार्य करता है तो उसे भारी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। जनपद सदस्य व सरपंच की प्रतिस्पर्धा के चलते सीईओ के दाबाव बनाने का प्रयास निरंतर किया जाता रहा है। गुरुर जनपद पंचायत में भी जनपद सदस्य व ग्राम सरपंचों की प्रतिस्पर्धा के चलते सीईओ के खिलाफ एक तरह से मोर्चा खोल लिया गया है। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में जब से सीईओ का पदार्पण हुआ है समूचे जनपद क्षेत्रों में विकास की बयार बह रही है जिससे आमजन बेहतर प्रसन्न है लेकिन सीईओ की इस कार्यशैली से कुछ सरपंचों को आपत्ति थी सो उन्होंने एक शिकायत कर हटाने् की मांग की थी लेकिन सरपंच संघ के अध्यक्ष द्वारा इस पर असहमति जताते हुए शिकायत वापस ले ली गई जिसके कुछ दिनों बाद जनपद सदस्यों को भी तकलीफ होने लगी और सीईओ को हटाने का एक नयाक्रम तैयार कर दिया। चर्चा के दौरान क्षेत्र के लोगों ने इस मांग की निंदा करते हुए कहा कि सीईओ के कार्य की प्रशंसा हो रही है यह बात कुछ सरपंच एवं जनपद सदस्यों को रास नहीं आई। उन्होंने अपना स्वार्थ पूर्ति न होता देख सीईओ पर दबाव बनाने की प्रक्रिया अपनाई है और स्थानांतर को अपना हथियार बना लिया है ताकि अधिकारी पर दबाव बनाकर स्वार्थ पूर्ति की जा सके। इस मामले में कलेक्टर से मांग की गई है कि उक्त सीईओ को यथावत रखते हुए हड़ताल क्यूं हो रही है इसकी सूक्षमता से जांच करें।
निष्पक्ष निर्भिक स्वतंत्र पत्रकारों के द्वारा भी इस सच्चाई को उजागर करने बीड़ा उठाकर गोपनीय तरीके से कर रहे अंदरूनी जांच पड़ताल से ज्ञात हुआ है कि मामला जैसा ऊपर से दिख रहा है वैसा है नहीं इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है कलेक्टर से सरपंच सचिव संघ ने शिकायत किया है कि शासन की योजनाओं के अंतर्गत हो रहे कार्यों में मनमानी निकासी पर रोक लगाने से स्वार्थपूर्ति में लगे लोगों का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। जिसके चलते वे लामबंद हुए हैं और सीईओ को हटाने दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं। ग्राउंड में काम कर रहे पत्रकारों का कहना है कि लगभग 20 से 25 पंचायतों में कमिशन का बड़ा खेल चल रहा है जिस पर लगाम कसने के कारण यह नाराजगी जाहिर करते हुए हड़ताल की जा रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक गुरूर ब्लाक के लगभग 20-25 ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार, आर्थिक आपराध एवं अनियमितताओं की जांच हो सकती है। उदाहरण के तौर पर बालोद जिले के एक बड़े ग्राम पंचायत में शासन के नियमों एवं निर्देशों को ताक पर रखते हुए केन्द्र से प्राप्त होने वाली 15वें वित्त्त आयोग के अनुदान राशि में स्वयं को लाभ पहुंचाते हुए अनुदान राशि का बंदरबांट किये जाने की शिकायत है। जबकि केन्द्र सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि 15वें वित्त अनुदान राशि से पुराने कार्य (पूर्व के शेष कार्य) को नहीं करवाया जा सकता। जबकि ग्राम पंचायत द्वारा टाइड एवं अनटाइड फण्ड में व्यय न करते हुए अनियमित व्यय किया गया है इसके लिए पंचायत द्व ारा किसी कार्य का प्राक्कलन तैयार नहीं किया गया है और पंचायत विभाग के तकनीकि अधिकारी द्वारा मूल्यांकन कराया गया है। इससे संदेह है कि कूट रचित ढंग से स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से अलग-अलग टुकड़ों में नियम विरुद्ध जाकर 15वें वित्त आयोग की दिशा निर्देशों की अवहेलना की गई है।
उक्त ग्राम पंचायत के द्वारा किसी भी कार्य का प्राक्कलन भी तैयार नहीं कराया गया है और न ही किसी कार्य के लिये पंचायत विभाग के तकनीकी अधिकारी द्वारा मूल्यांकन कराया गया है। साथ नियम विरूद्ध जाकर मोबाईल खरीदी की गई है। जो कि 15वें वित्त आयोग के दिशा निर्देशों की अवहेलना की गई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ऐसे इसी तरह के अनेक मामले गुरूर ब्लाक के लगभग 20-25 ग्राम पंचायतों में हुए भ्रष्टाचार, आर्थिक आपराध एवं अनियमितताओं पर अगर संज्ञान लिया जावे तो बड़े बड़े मामलों का खुलासा हो सकता है।

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