किसानों के साथ फर्जी “पैक हाउस” के नाम पर भारी घोटाला 

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  • दलाल-अधिकारियों की सांठगांठ से ऐसे चलता है गोरखधंधा

रायपुर। शासन चाहे कितनी अच्छी से अच्छी विकासपरक योजनाएं बना लें अगर योजना के क्रियान्वयन में गड़बड़ी हुई तो योजना का लाभ सही व्यक्ति तक नहीं पहुंच पायेगा। किसान हित के लिए बनाए गए पैक हाउस के नाम पर छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विभाग न केवल किसानों के साथ छल कर रहा है बल्कि इसकी आड़ में करोड़ों के घोटालों का भी खेल प्रदेश में चल रहा है !
राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत किसानों के विकास और उनके उत्थान के लिए उनके खेत में एक कमरा (पैक हाउस) बनाने के लिए 50 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है. इसका मुख्य उद्देश्य ये होता है कि किसान अपने खेत में एक पैक हाउस बनाएं और वहां अपने खेत में उगने वाली सब्जियों को तोड़कर रखें, जिससे सब्जी धूप में खराब न हो सके।
इस पैक हाउस के लिए सब्सिडी 50 प्रतिशत यानी दो लाख रुपए निर्धारित है. राज्य की गाइडलाइन के मुताबिक ये पैक हाउस पक्का यानी लेंटर वाला होना चाहिए. लेकिन उद्यानिकी विभाग के अधिकारी दलालों के साथ लंबा खेल, खेलकर टीन का शेड किसानों के खेत में लगा रहे है और बड़ी चालाकी से उक्त दलाल किसान से 2 लाख रुपए (सब्सिडी वाले) अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा रहे है.

  • क्या है सब्सिडी का नियम

जानकार बताते है कि सेंट्रल की गाइड लाइन के मुताबिक 9-6 मीटर का पक्का कमरा बनाया जाएगा. जिसकी अनुमानित लागत करीब 4 लाख रुपए आंकी गई है. इसके बाद किसान अधिकृत सिविल इंजीनियर से ये प्रमाणित करवाएंगा कि उसने नियमों के तहत उक्त पैक हाउस बनाया है. जिसके बाद वह बिल उद्यानिकी विभाग में जमा होगा और वहां से 2 लाख रुपए की सब्सिडी किसान के खाते में ट्रांसफर होगी.

  • ऐसे होता है खेल

लेकिन पूरे प्रदेश में उद्यानिकी विभाग के अधिकारी किसानों के साथ छल कर रहे है. हम आपको ये पूरा खेल समझाते है. उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ये स्कीम लेकर किसानों के पास पहुंचते है. विभिन्न दलालों के माध्यम से किसान के खेत में एक टीन का डब्बा नुमा शेड लगा दिया जाता है. जिसकी एवज में किसान से एडवांस चेक 2 लाख रुपए का पहले ही ले लिया जाता है. इसके बाद अधिकृत इंजीनियर से फर्जी प्रमाणिकरण करवाया जाता है कि वहां पक्का पैक हाउस बना है. जिसके लिए इंजीनियर का रिश्वत की फिक्स अमाउंट 10 हजार रुपए दी जाती है. इसके बाद उसी प्रमाणिकरण के आधार पर 2 लाख रुपए की सब्सिडी किसान के खाते में डाल दी जाती है. जैसे ही राशि किसान के खाते में जाती है वैसे ही किसान से लिया गया चेक दलाल बैंक में लगा देते है और सब्सिडी की पूरी राशि दलाल के पास. इसके बाद इस राशि का दलाल और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के बीच बंदरबांट होता है.

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